सौन्दर्य के रसपान से, बिसर गयी सुधबुध।
कविहृदय कर रहा शब्द बुनने का प्रयास।
सोच सोच कर हार गया फिर भी न तजि आस।
कवि था अकेला प्रयान में न मिला कोई जान।
प्रेमिका से विहस्य बोला अब तुम हि हो जलजान।
प्रयान में मैं था अकेला अब हू तव संग।
जीवन में जैसे आ गया नए गीत का रंग।
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